अर्धनारीश्वर

अर्धनारीश्वर
बचपन में देखा था पहली बार l
मानो पुरुष ने किया नारी शृंगार ll
पूछा मैंने मां, से यह कौन खड़े हैं द्वारा?
मां बोली, पूर्व जन्म के पापों से l
बेटा, किन्नर है सारे ll
हर जन्म पे जो बधाई बजाते l
क्यों मां, हम उन्हें नहीं अपनाते ll
जब ईश्वर सदा पूर्ण कहलाए l
तो उसकी रचना अधूरी क्यों मानी जाए ll
सुन समाज कहता में डंके की चोट पर l
हा सत्य, सत्य है मेरा हर एक एक अक्षर ll
अगर पूर्ण है तेरा जगदीश्वर l
तो संपूर्ण है उसकी रचना अर्धनारीश्वर ll
– रित्विक

2 comments

Well done, Ritwik.

Devrishi Gupta

Fabulous

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