हमारी अधूरी कहानी

*हमारी अधूरी कहानी*
जवानी की दहलीज पर कदम पड़े ही थे l जिंदगी भी अजीब कश्मकश के दौर से गुजर रही थी l रह रह कर अपने ही अंदर सवालों के सैलाब उमड़ रहे थे, अजीब सा डर, अजीब सी बेचैनी थी l जहां क्लास के सभी साथी अब जोड़ियों में बटने लगे थे, फ्रेंडशिप डे के बजाय वैलेंटाइंस डे का इंतजार करने लगे थे, वही में खुद को खुद में ढूंढ रहा था l
मुझे हमेशा से ही बात पता थी कि मैं औरों उसे कुछ अलग हूं lपर अब उस अलग की परिभाषा समझ आने लगी थीl मेरा आकर्षण लड़कियों के बजाय लड़कों में था l
कुछ समझ नहीं आ रहा था खुद से कभी कभी घृणा सी होने लगती थी, मन ही मन ऊपर वाले को याद किया करता था और अपने आप को ठीक कर देने को कहता था l उन्हीं दिनों दिल्ली में आयोजित प्राइड वॉक के विषय में जानने को मिला, तब पता चला दुनिया में मैं अकेला नहीं समाज में मेरे जैसे हजारों लोग हैं, और यह लोग अलग नहीं बिल्कुल साधारण है हर साधारण व्यक्ति की तरह l अब मन कुछ शांत था, मानो तूफान से लड़ती हुई नौका को किनारा मिल चुका हो l अब मन सपने बुनने लगा था l
कुछ डेढ़ दो महीने बाद विद्यालय में वाद विवाद प्रतियोगिता आयोजित हुई, नियमानुसार प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले छात्र को नेशनल लेवल वाद विवाद प्रतियोगिता के लिए चुना जाना था l आवाज तो मेरी हमेशा से ही अच्छी थी, विद्यालय स्तर पर वाद विवाद प्रतियोगिता जितना मेरे लिए कोई मुश्किल नहीं था l
और वह समय आया जब मेरा राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिता के लिए दिल्ली आना हुआ l
‌अनेकों युवाओं के बीच उस परिसर में मेरी नजर पड़ी मिश्रा जी पर जो लकड़ी की कुर्सी पर बैठ कर सबके लिए कमरे निर्धारित कर रहे थे, अपने कमरे का पता लेकर मैं सीधे पहुंचा अपने कमरे की ओर किसी भी बात का पूर्वानुमान ना होने के कारण झटके से दरवाजा खोलते हुए में अंदर दाखिल हुआ और एकदम स्तब्ध रह गया l मेरे सामने खड़ा था एक लंबा, आजान बाहु गेहुआ वर्ण तथा चमकीली आंखों वाला एक नवयुवक, तभी आवाज आई और मेरा ध्यान भंग हुआ, मेरी ओर हाथ बढ़ाते हुए उसने कहा, मेरा नाम है अथर्व मैं अंबाला का रहने वाला हूं, फिर एक छोटी सी हंसी हंसकर बोला अब 7 दिन तक तुमको परेशान करने आया हूं, मुझे भी यही कमरा मिला है l उसकी इस बात पर हम दोनों ही हंस पड़े और शुरु हुआ एक नई दोस्ती का रिश्ता…..
‌ देखते देखते 2 दिन बीते, मेरे मन में उसके लिए अजीब सी बेचैनी थी, उसका साथ मुझे अच्छा लग रहा था l उस दिन रात्रि भोजन के बाद हम दोनों वापस अपने कमरे में आए, उस दिन भारत और पाकिस्तान का मैच था l अथर्व की मैच में काफी रुचि थी वह कमरे में घुसते ही अपने मोबाइल पर लाइव मैच लगाकर बैठ गया l कुछ देर बीता ही था की वह मेरी तरफ देखा और बोला, ” मैच रोमांचक हो चला है, तुम देखना पसंद करोगे?” मेरी बचपन से खेलकूद में कोई रुचि नहीं रही पर मानो उसकी खुशी के लिए मेरा सर अपने आप ही हां कर गया l
मेरे हां भर की देरी थी कि वह आकर मेरे बगल में लेट गया l उसका शरीर मेरे शरीर से छूते ही मेरा माथा पसीने से तरबतर हो गया, जहां एक तरफ उसकी आंखें मोबाइल के स्क्रीन की ओर अपलक देख रही थी वही मेरी निगाहें एक टक उसके चेहरे की ओर देख रहे थे l दिल मानो धड़कनों में यह दुआएं कर रहा था की घड़ी का कांटा हमेशा के लिए यूंही रुक जाए और यह करीबी कभी दूरी ना बने l
तभी अचानक उसकी नजर, उसको देखते हुए मेरी नजरों पर पड़ी, मैं सहम उठा पलकें झुक गई, धड़कन है मानो मानो तीव्र गति से धड़कने लगी l वह शायद अब समझ चुका था कि मेरे दिल में उसके लिए कुछ था l
उसने फोन को बंद कर के बगल में रख दिया l
और मुझे जकड़ लिया अपनी बाहों में, और यूं ही हम रात भर एक दूसरे में डूबते चले गए l अधरपल्लव के रसास्वादन से अगले दिन की शुरुआत भी मीठी ही रही l
जागती हुई आंखें हजारों सपने देखने लगी l
यूं ही 7 दिन का सफर खत्म हो चला था, अश्रुपूर्ण आंखों को समझाते हुए अब विदा लेनी थी l
‌ मैं अथर्व के पास गया और उसे ज़ोर से गले लगा लिया l इस समय को मैं खत्म होने नहीं देना चाहता था l कि तभी अचानक मुझे पीछे धकेलते हुए, वह बोला कि मैं ऐसा बर्ताव कर रहा हूं जैसे कि उसकी पत्नी यां प्रेमिका हो l मैं कुछ बोल पाता उससे पहले ही उसके शब्द यह जता चुके थे कि पिछले 4 दिनों में मेरे साथ बिताया हुआ समय उसके जीवन में कोई अहमियत नहीं रखते और वह मात्र शारीरिक सुखों को भोगने के लिए था मैं मौन खड़ा सब सुनता रहा l
‌ अपनी बात कहकर व चल चल पड़ा, अब हमारे रास्ते अलग हो चुके थे l उसके कमरे से निकलते ही, मेरा भी उस कमरे में दम घुटने सा लगा उसके साथ बिताए हुए पल उस कमरे की यादें आंखों के सामने घूमने लगी l मैं घर लौट आया आज इस बात को 7 साल 4 महीने 17 दिन हो चुके हैं पर आज भी मेरा दिल अपने उस पहले प्यार की पहली याद को संजोए बैठा है l कितना मुश्किल है भुला पाना, की अधूरी है मेरी प्रेम कहानी l और ना जाने हम जैसे लोगों के जीवन में ऐसी कितनी ही अधूरी कहानियां होती हैं जो दिल के कोनों में हमेशा के लिए दबी रहती हैं l
समझते अगर हमें भी प्यार के काबिल तुम तो जान पाते किस कदर चाहते थे तुम्हें l पर जाओ आजाद हो तुम बार बार हमारा दिल तोड़ने के लिए, बार-बार हमारे करीब आकर हमसे दूर जाने के लिए l क्योंकि हमने भी समझौता कर लिया अपनी अधूरी कहानी से l
– रित्विक

4 comments

Heart touching content..
I don’t know weather this story is true or not. But this is a reality of every 10th person in this world…

Nice story….yr
padhte padhte…kho gya usi kahani me

Buddhadev Chatterjee

heart touching…

Soul touching story
Full of emotions and true feelings

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