Month: December 2018

अर्धनारीश्वर

अर्धनारीश्वर
बचपन में देखा था पहली बार l
मानो पुरुष ने किया नारी शृंगार ll
पूछा मैंने मां, से यह कौन खड़े हैं द्वारा?
मां बोली, पूर्व जन्म के पापों से l
बेटा, किन्नर है सारे ll
हर जन्म पे जो बधाई बजाते l
क्यों मां, हम उन्हें नहीं अपनाते ll
जब ईश्वर सदा पूर्ण कहलाए l
तो उसकी रचना अधूरी क्यों मानी जाए ll
सुन समाज कहता में डंके की चोट पर l
हा सत्य, सत्य है मेरा हर एक एक अक्षर ll
अगर पूर्ण है तेरा जगदीश्वर l
तो संपूर्ण है उसकी रचना अर्धनारीश्वर ll
– रित्विक

Posted by Ritwik in By Author, By Genre, By Language, By Title, Hindi, Poem / Poetry, 1 comment

A Poem for Pride

I walk, they whisper.
I run, they talk.
I fall, they laugh.
Yet, with Pride I get Up.

Pride! My Pride! Your Pride!
Our Pride! Their Pride!
Everyone’s Pride! To be
Who we’re and say it Freely.

Freely and with no Fear.
To paint the Rainbow
Across our faces and
Say, “Yes, we’re Queer”.

“Queer, we’re and Lesbian too
Yes, and Gay and Bi- and
Trans- too”, say it freely
Here, and there in the Pride too.

Posted by Mohit Rai in By Author, By Genre, By Language, By Title, English, Poem / Poetry, 1 comment