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इतनी नफ़रत कहाँ से लाते हो?

हमारे महान देश में
बलात्कार की सज़ा सात साल
एलजीबीटी प्रेम की सज़ा दस साल
इतनी नफ़रत कहाँ से लाते हो भाई
डबल्यूएचओ यानी विश्व स्वास्थ्य संस्थान कहता है कि एलजीबीटी होना कोई मानसिक या शारीरिक बीमारी नहीं है।
यह उतनी ही प्राकृतिक है जितनी कि बारिश या हवा
लेकिन हाँ!
होमोंफोबिया एक मानसिक बीमारी है
यक़ीनन है
आइये अब धारा ३८८ के बारे में बात करें
शायद आपको मालूम नहीं ये क्या है
आदम और ईव के सम्बन्धों के बाद
कोर्ट और जज ने फ़ैसला किया कि उस क़िस्म का सेक्स नैसर्गिक है और बाक़ी सब अनैसर्गिक है।
यह कोई कैसे मान ले।
बॉलीवुड से हमने गाना बजाना आदि सीखा और अब सेक्स करना कोर्ट से सीखना होगा।
लेकिन नहीं आप या ये समाज हमें ये नहीं बता सकते कि हम बिस्तर पे क्या करें और क्या ना करें।
हिंदुस्तान में सेक्स के बारे में बात करना मना है लेकिन बलात्कार नहीं।
यही एक समस्या है।
सेक्स के बारे में जानकारी तो है लेकिन सेक्स के बारे में ज्ञान नहीं है।अगर बॉलीवुड पर बात शुरू ही हुई है तो आपको याद होगा एक फ़िल्म आयी थी – हम दिल दे चुके सनम। इस फ़िल्म में उसकी नायिका ने नायक से कहा था कि चुम्बन करने से बच्चा हो जाता है और इसीलिए पॉलीथीन पहने कर चुम्बन करना चाहिए।

आईये ३८८ पे वापस आते हैं। ये बकवास सन १८६० में शुरू हुई थी और लगभग उस वक़्त के सभी अंग्रेज़ी हुकूमत में किसी न किसी शक्ल में लागू की गयी थी। आज जिन्होंने ये क़ानून बनाया था वो वहाँ से हटा दी गयी है लेकिन हमारे देश आज भी है। हिंदुस्तान में अनेकों कुरीतियाँ जैसे सति प्रथा, बाल विवाह, दहेज, इत्यादि क़ानूनी रूप से ख़त्म की जा चुकी हैं मगर अंग्रेज़ों की देन धारा ३७७ आज भी है।

अगर मैं अपने पुरुष मित्र का हाथ पब्लिक जगह में पकड़ता हूँ तब भी लोग ३७७ का ज़िक्र छेड़ देते हैं। लेकिन यहाँ मैं एक बात साफ़ करना चाहता हूँ कि ३७७ की धारा सब पर लागू होती है। गुदा मैथुन, मुख मैथुन, जैसे यौनिक कार्यों पे भी ३७७ लगता है। सेक्स और पोर्न जैसे शब्द बोलने से ही लोगों को हमारी सभ्यता ख़तरे में लगने लगती है। लेकिन यही समाज बलात्कार, बाल हिंसा, किसी भी प्रकार की यौनिक हिंसा, ट्रैफ़िकिंग, घरेलू हिंसा, आदि पर बहस नहीं करता है। लेकिन एलजीबीटी को अपराधी मानने से पीछे नहीं हटता। एलजीबीटी होना कोई अपराध नहीं है। ये एक यौनिकता है, ख़ुशी है, आज़ादी है। और अगर किसी पेरेंट्स को लगता है कि समलैंगिक बच्चों से उनका ख़ानदान आगे नहीं बढ़ेगा तो ये बात ग़लत है। बच्चे गोद भी लिए जा सकते हैं। एक बात और हम लोग विश्व की २% ज़मीन पे १७% बच्चे पाल रहे हैं। और एक बात साफ़ करना चाहूँगा – एलजीबीटी होना कोई इंसान को छोटा नहीं बनाता बल्कि उसकी सोच उसको छोटा या बड़ा बनाती है। सभी इंसान बराबर हैं। एक दरखास्त है – बॉलीवुड में जिस तरह से एलजीबीटी के किरदारों को दर्शाया जाता है कृपया उस पर हमें जज ना करें तो मेहरबानी होगी। जो एलजीबीटी समुदाय के लोग जिन्होंने सफलता पायी हो उनसे हमारे बारे में जाने। संस्कारी होने का दिखावा मत करें।

मेरा समलैंगिक होना आपसे वास्ता नहीं रखता है। पता नहीं हमारे अच्छे दिन कब आएँगे? समाज से हम प्रेम और आपसी आदर कि अपेक्षा रखते हैं। एक आख़िरी बात – बाबा लोग इन सब से दूर ही रहें तो अच्छा है।

चलिए अब मैं अपना परिचय दे दूँ। हेलो , मैं एक सैपीयोसेक्शूअल हूँ। आप सभी को मेरा प्यार और शुक्रिया मेरे लेख को पढ़ने के लिए।

Posted by Barkat in By Author, By Title, Hindi, Political, 5 comments